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पीने लायक नहीं गंगा सहित सात नदियाें का पानी

जल जीवन है और नदियां हमें जल देती हैं। इसीलिए नदियों को जीवन दायनी कहा जाता है। मगर मौजूदा हालत और हालत में आप नदियों को जीवन दायनी नहीं कह पाएंगे। इनका पानी पिया तो बिस्तर पकड़ लेंगे। नदियों के किनारे बसे शहरों के लोग मानते हैं कि अब बिना ट्रीटमेंट पानी नहीं पिया जा सकता।
द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टी्यूट (टेरी) ने सात नदियों और सात शहरों के लोगों को शामिल करके एक सर्वेक्षण किया है। इसमें शामिल 86 फीसदी लोगों ने माना उनके शहर से गुजरने वाली नदी का पानी अब पीने लायक नहीं रहा।

कहां-कहां हुआ सर्वेक्षण
दिल्ली- यमुना के लिए, कटक-महानदी, असम का डिब्रूगढ़- ब्रह्मपुत्र के लिए, नर्मदा के लिए मध्यप्रदेश के जबलपुर, ताप्ती के लिए गुजरात के सूरत, वाराणसी में गंगा के लिए और कृष्णा नदी के लिए विजयवाड़ा में।

क्या रहे नतीजे
तकरीबन 93 फीसदी लोगों ने माना कि नदियों की गंदगी के लिए सीवर और नाले जिम्मेदार हैं। वहीं 92 फीसदी ने कहा कि सीवर का पानी नदियों में बहाने से पहले उसे ट्रीट करना चाहिए।

गंगा की हालत
सर्वेक्षण में शामिल बनारस के 96 फीसदी लोगों ने माना कि गंगा का पानी सीधे पीने लायक नहीं है। 58 फीसदी लोगों ने यह भी कहा कि गंगा नदि के आसपास का वातावरण खराब हो गया है।

यमुना पर बोली दिल्ली
यमुना का पानी पीने लायक नहीं है ये तो सब जानते हैं। दिल्लीवालों ने इसके लिए सीधे तौर पर सीवेज को जिम्मेदार ठहराया। दिल्ली की 99 फीसदी जनता मानती है कि सीवर के पानी ने ही यमुना के पानी में जहर घोला है।

by bodylab.in team

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